सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स और कस्टम (CBIC) ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन, टैक्स डिमांड और एक्सपोर्ट पेमेंट्स समेत अलग-अलग मुद्दों पर 8 सर्कुलर जारी किए हैं। इनका उद्देश्य टैक्स अनुपालन की प्रक्रिया को आसान बनाना, टैक्स अधिकारियों के कामकाज में एकरूपता लाना और टैक्सपेयर्स को प्रक्रियागत स्पष्टता देना है। ये सर्कुलर इस महीने की शुरुआत में हुई जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में लिए गए फैसलों के अनुरूप जारी किए गए हैं।
CBIC ने 26 अक्टूबर को जारी दिशानिर्देशों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट और सहमति पत्र, हलफनामे तथा शपथ पत्र के प्रारूप दिए हैं। इससे रजिस्ट्रेशन आवेदनों पर कार्रवाई के दौरान टैक्स अधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण या अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की जरूरत कम होने की उम्मीद है।
टैक्सपेयर्स को भेजे जाने वाले नोटिस में होना चाहिए आरोपों और कार्रवाई के आधार का स्पष्ट उल्लेख
बोर्ड ने केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत टैक्स डिमांड, न्यायनिर्णयन (Adjudication) और अपील की कार्यवाही पर भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक, जहां संभव हो, टैक्सपेयर्स को कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले अपना पक्ष स्पष्ट करने का मौका दिया जाए। नोटिस में आरोपों और कार्रवाई के आधार का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
इसके साथ ही, सीबीआईसी ने स्पष्ट किया कि टैक्स डिमांड उठाते समय अधिकारियों को टैक्सपेयर की तरफ से टैक्स चोरी की मंशा को साबित करना होगा। ऐसा होने पर ही धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को छिपाने से जुड़े कड़े प्रावधान लागू किए जा सकेंगे।
एआई के इस्तेमाल पर मानवीय निगरानी अनिवार्य
बोर्ड ने टैक्स निर्धारण से जुड़े न्यायनिर्णयन प्रक्रिया में एआई और अन्य प्रौद्योगिकी साधनों के इस्तेमाल पर मानवीय निगरानी अनिवार्य की है। एआई से मिली जानकारी पर भरोसा करने या उसे आदेश में शामिल करने से पहले उसकी सटीकता का स्वतंत्र सत्यापन करना होगा। एक्सपोर्टरों के लिए जारी एक अन्य सर्कुलर में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अनुमति-प्राप्त समायोजन व्यवस्था को मान्यता दी गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक, अगर निर्यात से मिलने वाले पैसों का आयात भुगतान के साथ एडजस्ट किया जाता है, तो एकीकृत जीएसटी कानून के तहत सेवाओं के निर्यात के लिए निर्धारित भुगतान प्राप्ति की शर्त पूरी मानी जाएगी। इन सर्कुलर पर अपनी प्रतिक्रिया में कंसल्टिंग फर्म ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि इससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड में स्पष्टता आएगी और जीएसटी व्यवस्था विदेशी मुद्रा के अनुमत निपटान तरीकों के अनुरूप होगी।
जीएसटी काउंसिल की 57वीं मीटिंग में कई बदलावों को दी गई थी मंजूरी
जीएसटी काउंसिल की 57वीं मीटिंग में कानून और प्रक्रियाओं को अपराध के दायरे से बाहर लाने जैसे कई बदलावों को मंजूरी दी गई थी। इनमें टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियां खत्म करना और अभियोजन के लिए टैक्स राशि की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करना शामिल है।
हालांकि, इन कानूनी संशोधनों के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी और ये अगले साल 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। जहां तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े बदलावों का सवाल है तो उन्हें परिपत्रों के जरिये लागू किया जा रहा है।
PTI Inputs
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